जब इस पार्टी के महासचिव की वजह से कांग्रेस अध्यक्ष इंदिरा गाँधी को देना पड़ा था JNU चांसलर पद से इस्तीफा..

आज जिन वामपंथियों का समर्थन कर रहे हैं कांग्रेसी, एक समय ऐसा भी था जब इन वामपंथियों की वजह से कांग्रेस अध्यक्ष इंदिरा गाँधी को देना पढ़ा था इस्तीफ़ा...

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हाल-फिलहाल दुनिया भर में गुर्मेहर,जेएनयू और डीयू एक चर्चा का विषय बन गया हैं  जेएनयू की जब बात होती है तो सबसे पहले वामपंथियों की सोच का मुद्दा सबसे पहले उभर कर आता है. यह सोच ऐसी होती है जो अपने ही देश के बारे में गलत गलत धारणाएं बनाये रखती है| वामपंथियों की बात करें तो यह वो लोग होते है जो हर वक़्त भारत विरोधी नारे लगते है जैसे कि: “भारत की बर्बादी तक, जंग लड़ेंगे, जंग लड़ेगे” और “कितने अफजल मारोगे, हर घर से अफजल निकलेगा” साथ ही भारत के बजाये यह लोग ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लगाते दीखते है|

फिर अगर ऐसी सोच का कोई भी पार्टी विरोध करती है तो उस पार्टी को यह लोग अपना दुश्मन मान लेते हैं| जैसे की अगर हम गुर्मेहर कौर की बात करें तो उसके एक बयान के बाद मानों राजनीति में एक भूचाल सा मच गया हो..जहाँ ABVP, BJP और RSS वाले गुर्मेहर का विरोध कर रहे हैं तो वही Congress party और Samajwadi party गुर्मेहर के समर्थन में खड़ी नज़र आ रही है जिनका कहना है की हर व्यक्ति को “FREEDOM OF SPEECH AND EXPRESSION” के तहेत अपने दिल की बात कहने का पूर्ण अधिकार है|

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