जब सुप्रीम कोर्ट का खुलेआम हुआ अपमान.. कहीं सपा नेता ने चलवाई गोलियां तो कहीं गलत देखकर भी अंदेखा करते रहे अधिकारी

वो 'अयोध्या विवादित ढांचा' वाकई विवाद था या केवल राजनीतिक पार्टियों के लिए मौका....

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सालों से चल रहे अयोध्या विवादित ढाँचे के चलते, इलाके में लगी कड़ी सुरक्षा में कैदी का जीवन जीने को है अयोध्या के लोग मजबूर 

दो दशक से भी ज्यादा समय बीत चुका हैl लेकिन कुछ बातें जेहन में ऐसे बैठ जाती हैं जो हमेशा याद रहती हैंl आप उसे भुलाना भी चाहें तब भी ये मुमकिन नहीं होताl 6 दिसंबर 1992 का दिन भी कुछ ऐसा ही माना जा सकता हैl आज देश भर में यह लड़ाई लड़ी जा रही है कि राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद की विवादास्पद 2.77 एकड़ भूमि पर मालिकाना हक किसका है।..? हालांकि 30 सितंबर 2010 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस भूमि को हिंदू, मुसलमान और निर्मोही अखाड़े में बांटने का फैसला सुनाया था लेकिन इस फैसले से कोई भी पक्ष खुश नहीं था और अब मामला सर्वोच्च न्यायालय में हैl

जिस दिन इस विवादित भूमि पर कोर्ट अपना फैसला सुनाने वाली थी, अयोध्या के लोग यही दुआ मांग रहे थे कि बस किसी तरह इतने सालों बाद अब तो मामला निपट जाए और कोर्ट दो टुक होकार फैसला सुना ही देl क्योंकि इस बात में कोई दोराय नहीं है कि सदियों से चल रहे इस विवाद के चलते इस इलाके में हर वक़्त इतनी कड़ी सुरक्षा होना उनके लिए वाकई किसी कैद से कम नहीं हैl लेकिन 30 सितंबर 2010 को आये इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले ने हजारों लोगों की उम्मीद तोड़ दी और उन्हें तब भी मुक्ति नहीं मिलीl इसके बाद अगर आज भी गाहे-बगाहे जब कभी मंदिर बनाने की बात होती है, वहां सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी जाती हैl आज भी वो विवादित परिसर पूरी तरह से केंद्र सरकार के कड़े सुरक्षा घेरे में हैl सरकार किसी भी चूक के लिए तैयार नहीं हैl

वहीँ अगर 24 साल पहले यही मुस्तैदी दिखाई होती तो वह इतेहास का काला दिन जिसने न जाने किनी मासूम जिंदगियों को मौत के घाट उतार दिया था शायद उसकी कभी नौबत नहीं आतीl वाकई उस दिन के बारे में सुनकर किसी की भी रूह काँप जाए जब 24 साल पहले अयोध्‍या गोली कांड हुआ था जिसमे दरिंदगी की हद लांघ दी गई थीl

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