सविता भाभी की कामोत्तेजना क्यों नहीं होती शांत..

जब डर पर भारी पड़ा कामना..

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मेरी कामनाओ की पतंग उड़ान भरने को उतारू थी..तब तक अचानक राजू आ गया उसने कहा “चलो चलते है दारू पिने” मैंने कहा “मुझे कुछ काम है तू जा” यह कह कर मैं उसे टाल दिया..फिर राजू परदे के पीछे खडी मेरी पत्नी सविता के पास चला गया..और सविता के शरीर को स्पर्श करतें हुए पूछा “भाभी क्या बनाई हो खाने मे ?” सविता बोली मटन बन गया है रोटी बनानी बाकी है..राजू ने सविता का हाथ स्पर्स करते हुए कहा “चलो रोटी मैं सेक देता हु.” राजू ने जिस अंदाज से सविता को छुआ था..मुझे एहसास हो गया था की कामनाओ की बारिश से वो भी पीड़ित था..

फिर जैसे सविता राजू के साथ किचन में रोटी सेकने गयी, मानो राजू ने यौन रश चख लिया हो..अब उसकी प्यास और ज्यादा भड़क गयी थी..जब किचन में सविता आटा गुद रही थी, तब अचानक राजू पीछे से उसे पकड लिया, अब सविता उसके इरादें भाप चुकीं थी लेकिन वो अपने कामना पर काबू पाने की कोसिस कर रही थी, इस डर से की कही कोई आ ना जाये, लेकिन राजू के हाथ बेकाबू घोड़े के तरह मुलायम रेत के टीलो पर दौड़ रहे थे.

जानिए अगले स्लाइड में सविता भाभी की कामनाओ के आगे डर जीता या हारा ?

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