जिनको Google ने दी इतनी महत्वता उन सावित्रीबाई फुले को आप कितना जानते हैं?

गूगल ने सामाजिक सुधारक और कवि सावित्रीबाई फुले के जन्मदिन पर डूडल बनाकर उन्हें श्रद्धांजलि दी

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कौन है सावित्रीबाई फुले 

सावित्रीबाई फुले भारत की एक समाज सुधारिका एवं मराठी कवयित्री थीं। उन्होने अपने पति महात्मा ज्योतिराव फुले के साथ मिलकर स्त्रियों के अधिकारों एवं शिक्षा के लिए बहुत से कार्य किए। सावित्रीबाई भारत के प्रथम कन्या विद्यालय में प्रथम महिला शिक्षिका थीं। उन्हें आधुनिक मराठी काव्य की अग्रदूत माना जाता है।1852 में उन्होने अछूत बालिकाओं के लिए एक विद्यालय की स्थापना की।
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गूगल ने अपने डूडल के जरिये दी सावित्रीबाई को श्रद्धांजलि

ऐसे में गूगल ने आज भारत की पहली महिला शिक्षिका, समाज सुधारक और मराठी कवयित्री सावित्रीबाई फुले को उनके 186वें जन्मदिन पर अपने अनोखे तरीके से ही डूडल के जरिये श्रद्धांजलि दी है| डूडल ने सावित्रीबाई को अपने आंचल में महिलाओं को समेटते दिखाया है यह इसलिए क्योंकि सावित्रीबाई ने उस समय महिलाओं के विकास के बारे में सोचा, जब भारत में अंग्रेजों का राज था|

 

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लाख परेशानियों के बावजूद औरतों को पढ़ाने जाती थी स्कूल 

ऐसा कहा जाता है कि सावित्रीबाई स्कूल जाती थीं तो महिला शिक्षा के विरोधी लोग उन्होंने पत्थर तक से मारते थे, उन पर गंदगी फेंक देते थे, ताकि वो स्कूल न जायें| दरअसल महिलाओं का पढ़ना उस समय पाप माना जाता था, लेकिन सावित्रीबाई ने औरतों को पढ़ाने की ठान ली थी और इसलिए वो अपने साथ हमेशा एक साड़ी थैले में लेकर चलती थीं और स्कूल पहुंचकर गंदी कर दी गई साड़ी बदल लेती थीं|
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प्लेग की वजह से हुई दुर्भाग्यपूर्ण मौत 

1940 में नौ साल की उम्र में उनका विवाह 12 वर्षीय ज्योतिराव फुले से हुआ था। जिसके बाद उन्होंने यशवंतराव को गोद लिया था| फुले दंपति ने जिस यशवंतराव को गोद लिया था वे एक ब्राह्मण विधवा के बेटे थे| सावित्रीबाई ने अपने बेटे के साथ मिलकर अस्पताल भी खोला था| इसी अस्पताल में प्लेग महामारी के दौरान सावित्रीबाई प्लेग के मरीज़ों की सेवा करती थीं| एक प्लेग के छूत से प्रभावित बच्चे की सेवा करने के कारण उनको भी यह बीमारी हो गई, जिसके कारण उनकी 10 मार्च 1897 को मौत हो गई|

वीडियो के जरिये जानिए सावित्रीबाई फुले को थोड़ा और करीब से

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