इस जगह पर 13 बार हारी थी अंग्रेजी सेना, तोप के गोले जाकर दीवारों में धस जाते थे

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राजस्थान का इतिहास अगर हम देखते है तो पता चलता है कि इस भूमि का इतिहास हमेशा से गौरवशाली रहा है। यहां के राजाओं के पराक्रम से हम सभी अच्छे से परिचित है कि कैसे इन राजाओ ने अपनी रियासत के लिए जान की परवाह तक नहीं की। राजाओं ने मातृभूमि की सेवा के लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया। यहां की ऎसी ही एक रियासत थी भरतपुर। भरतपुर को राजस्थान का पूर्व सिंह द्वार भी कहा जाता है। यहीं स्थित है ये किला, जिसे अजेय दुर्ग लोहागढ़ कहा जाता है। इस किले पर न तो अंग्रेज फतह कर पाए थे और न ही मुगल। इस किले पर 13 युद्धों के दौरान दागे गए गोलों का भी कोई असर नहीं हुआ था। तोप के गोले किले की दीवार में धंस जाते थे। यहां जाट राजाओं की हुकूमत थी, जो अपनी दृढ़ता के लिए जाने जाते थे।

13 बार हुआ किले पर हमला

इतिहासकार बताते है कि इस किले पर अंग्रेजों ने 13 बार आक्रमण किया, किन्तु हर बार उन्हें हार का ही सामना करना पड़ा। ऐसा सुनने में आता है कि अंग्रेजों की सेना हर बार हारने से हताश हो गई तो वहां से भाग खड़ी हुई। ये भी कहावत है कि भरतपुर के जाटों की वीरता के आगे अंग्रेजों की एक न चली थी। अंग्रेजी सेनाओं से लड़ते-लड़ते होल्कर नरेश जशवंतराव भागकर भरतपुर आ गए थे। जाट राजा रणजीत सिंह ने उन्हें वचन दिया था कि आपको बचाने के लिए हम सब कुछ बलिदान कर देंगे।

आगे देखिये जब जाट राजाओ ने किया अंग्रेजों को चैलेन्ज