प्राचीन समय से ही ‘स्वास्तिक’ रहा है दुनिया भर की संस्कृति का हिस्सा।

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संस्कृत में स्वास्तिक शब्द का मतलब सौभाग्य है.

स्वास्तिक को विश्व के कई देशों में अलग-अलग नामों से पहचाना जाता है. इन देशों के लिए स्वास्तिक के चिन्ह का अपना एक अलग अर्थ और महत्व रहा है. वहीं भारत में इस चिन्ह को भगवान गणेश और लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है. यही कारण है कि यहां किसी भी शुभ कार्य को शुरू करने से पहले इसे पूजा की जगह पर चिन्हित किया जाता है. चार हज़ार साल पहले सिंधु घाटी की सभ्यता में भी स्वास्तिक के प्रमाण मिलते हैं. वास्तुशास्त्र के अनुसार स्वास्तिक उत्तर, पश्चिम, पूर्व, दक्षिण दिशाओं का प्रतीक है. लेकिन लंबे समय से सौभाग्य का प्रतीक रहे स्वास्तिक के चिन्ह को उस समय खौफ़ और नफ़रत का प्रतीक माना जाने लगा जब इस चिन्ह को हिटलर ने अपना लिया था.

1. पूर्वी यूरोप


यूरोप के शुरुआती दौर में स्वास्तिक का प्रयोग एक पवित्र चिन्ह के रूप में किया जाता था. वास्तव में इसका संबंध सबसे शाक्तिशाली नॉर्स देवता, ‘थॉर’ से है. यह माना जाता है कि उनके प्रसिद्ध हथौड़े के पीछे ‘स्वास्तिक’ का चिन्ह बना था.

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