कांग्रेस ने मीरा कुमार को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया है लेकिन उनके पिता ने कांग्रेस को ख़त्म करने का बना चुके थे प्लान …

जब मीरा कुमार के पिता ने इंदिरा गाँधी को घुटनों पर ला दिया था

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देश में राष्ट्रपति चुनाव 17 जुलाई को होने वाले हैं| ऐसे में जहाँ एक तरफ NDA ने अपना उम्मीदवार रामनाथ कोविंद मैदान में उतार कर लोगों को हैरान कर दिया वहीँ उसी दिन से विपक्ष इस उठापटक में जुट गयी कि आखिर रामनाथ कोविंद के खिलाफ किसे उतारा जाये| खैर घंटो की मीटिंग और पार्टी के सभी बड़े-छोटे नेताओं ने मिलकर पूर्व लोकसभा स्पीकर मीरा कुमार पर सहमति जताई और उन्हें रामनाथ कोविंद के खिलाफ मैदान में उतार दिया|

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विपक्ष ने भी मैदान में उतारा अपना कैंडिडेट

आपको बता दें कि जब NDA ने अपना उम्मीदवार घोषित किया था तो देखा जा रहा था कि विपक्ष सरकार द्वारा घोषित उम्मीदवार को समर्थन देती है या अपना अलग उम्मीदवार मैदान में उतारती हैl दरअसल NDA ने दलित वर्ग से उम्मीदवार मैदान में उतारकर विपक्ष के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी थी और विपक्ष पूरी तरीके से सोच में था कि वो समर्थन करे या विरोध, लेकिन इन सब को दरकिनार करते हुए अब विपक्ष ने अपना उम्मीदवार मीरा कुमार के रूप में उतार दिया है| मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, विभिन्‍न दलों के नेताओं की मौजूदगी में यह तय किया गया कि पूर्व लोकसभा स्‍पीकर मीरा कुमार को राष्‍ट्रपति पद का उम्‍मीदवार बनाया जाएगा।

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जब मीरा कुमार के पिता ने इंदिरा गाँधी को घुटनों पर ला दिया था

हालांकि यहाँ सबसे दिलचस्प बात ये है कि आज विपक्ष जिस मीरा कुमार को अपनी उम्मीदवार बना कर जीत के सपने संजो रहा हैं उन्ही मीरा कुमार के पिता जगजीवन राम ने कभी दिग्गज कांग्रेसी लीडर और देश की पूर्व पीएम इंदिरा के खिलाफ मोर्चा खोला था| दरअसल जगजीवन राम देश के सबसे प्रभावशाली राजनीतिक चेहरों में से एक थे।

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इंदिरा गाँधी के एक शक ने खींची जगजीवन रमा और उनके बीच कभी ना मिटने वाली दीवार 

जगजीवन राम और इंदिरा गाँधी के बीच दीवार उस वक़्त खड़ी हो गयी जब कांग्रेस का विभाजन हुआ| विभाजन के वक़्त जगजीवन राम इंदिरा गांधी के पाले में तो आ गए, लेकिन एक मुद्दे ने उनके और गाँधी परिवार के बीच ऐसी खाई खोद डाली जिसे अंत तक कोई नहीं भर पाया| दरअसल विभाजन के बाद एक वक़्त ऐसा आया जब इंदिरा गाँधी को शक हो गया कि जगजीवन राम बतौर पीएम उनको रिप्लेस करने की ख्वाहिश रखते हैं।

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…और इंदिरा गाँधी को झेलनी पड़ी हार 

यह वही वक्त था जब इलाहाबाद हाई कोर्ट ने इंदिरा गांधी की सदस्यता रद्द कर दी थी। बस फिर क्या था जब इंदिरा ने 1977 में चुनाव का ऐलान किया तब ही सही मौका देखकर जगजीवन राम ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया| उन्होंने एचएन बहुगुणा के साथ मिलकर कांग्रेस फॉर डेमोक्रेसी बनाई और जनता पार्टी के साथ मिलाया और इसका नतीजा ये हुआ कि इंदिरा गाँधी को शर्मनाक हार का सामना करना पड़ा।

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और फिर जगजीवन राम ने अपनी अलग ही पार्टी बना ली 

इंदिरा गाँधी के खिलाफ जगजीवन राम यूँ ही नहीं हार मानने वाले थे उन्होंने गाँधी परिवार की खिलाफ़त के साथ ही जयप्रकाश नारायण का समर्थन भी हासिल कर लिया था| हालाँकि इतना कुछ करने के बावजूद वह अपनी उम्मीदवारी के लिए पर्याप्त समर्थन नहीं जुटा पाए और उन्हें डेप्युटी पीएम के पद से ही संतोष करना पड़ा। इसके बाद जनता पार्टी ने उन्हें 1980 के चुनावों के पीएम कैंडिडेट बनाया, लेकिन तबतक इंदिरा गांधी की सत्ता में वापसी हो गई थी, जिसके चलते जगजीवन राम ने जनता पार्टी छोड़कर कांग्रेस (जे) बनाने का निर्णय किया। हालांकि, उनका यह राजनीतिक दांव फेल हो गया। जगजीवन राम 1984 चुनाव में अपनी लोकसभा सीट बचाने में कामयाब रहे, लेकिन उनकी पार्टी चुनावों में बुरी तरह फेल हो गई। 1986 में उनकी मौत हो गई।