मोदी और शाह की रणनीति के आगे फिर धराशाही हुई कांग्रेस

सोनिया गाँधी लेफ्ट और ममता के फेर में फंसी रहीं और बाजी बीजेपी ने मार ली

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नए राष्ट्रपति उम्मीदवार को लेकर लगता है कांग्रेस की कोई रणनीति कामयाब होती नही दिख रही है |एनडीए के राष्ट्रपति उम्मीदवार रामनाथ कोविंद के सामने कांग्रेस का कोई प्रत्याशी टिकता हुआ नही दिखाई  दे रहा है |इस बात को लेकर कई विपक्षी पार्टियों का यह भी मानना है कि कांग्रेस अपनी रणनीति बनाने में बीजेपी के मुकाबले कहीं न कहीं चूक गई |

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विपक्षी पार्टियों का कहना है कि अगर कांग्रेस किसी दलित को अपना उम्मीदवार बनाती है तो भले ही वह दलित के खिलाफ दलित को खड़ा कर दे लेकिन दलित राजनीति को लेकर बीजेपी इस मामले में पहले ही अपनी चाल चल चुकी है |विपक्षी पार्टियों का कहना है कि अगर कांग्रेस अपने दलित प्रत्याशी को एनडीए के उम्मीदवार से पहले ही घोषित कर देती तो उसे दलित राजनीति का फ़ायदा हो सकता था |

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अब हालात ऐसे हो गए है कि सभी राजनैतिकत पार्टियाँ  रामनाथ कोविंद के पक्ष में अपने समर्थन से  नफ़ा नुकसान  के बारे में भी सोच रहीं है |अधिकतर सभी पार्टियाँ दलित राजनीति करती है इस वजह से भी वो एनडीए को अपना समर्थन कर रहीं है |कांग्रेस की तरफ से राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार मीरा कुमार को लेकर उत्तर प्रदेश की दो प्रमुख पार्टियां सपा और बसपा भी अभी असमंजस में है |

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एक तरफ सपा और बसपा के सामने ये भी दिक्कत है कि आज तक उत्तर प्रदेश से कोई भी व्यक्ति राष्ट्रपति नही बना है |ये पहला अवसर है कि जब उत्तर प्रदेश से किसी उम्मीदवार को राष्ट्रपति बनने का मौक़ा मिल रहा हो और प्रदेश की ये दोनों बड़ी पार्टियाँ इसमें रोडें अटकायें | मायावती अब इस बात को लेकर भी असमंजस में है कि अगर वह मीरा कुमार का समर्थन करती हैं तो इसका मतलब यह हुआ की वह उत्तर प्रदेश के उम्मीदवार को नकार रहीं हैं|