पानी बचाने के लिए बड़े- बड़े वैज्ञानिक जो नहीं कर सके उसे एक मामूली बस ड्राइवर ने कर दिखाया…

एक हादसे ने बदल दी बस ड्राईवर की ज़िन्दगी और बना दिया पर्यावरण का योद्धा...

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उडुपी में समाज और पर्यावरण के लिए काम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे जोसफ जीएम रिबेलो कभी बस ड्राइवर हुआ करते थे, लेकिन एक गंभीर हादसे ने उनकी जिंदगी को बदल कर ही रख दिया। उन्होंने सूखे पड़े बोरवेलों को भरने का एक अनोखा तरीका ढूंढ निकाला है। एक ओर तो वो पिछले साल से अपने इस तरीके से कई बोरवेल भर चुके हैं और दूसरी ओर वो अपनी इस तकनीक के बारे में कई कॉलेजों व संस्थानों में प्रेजेंटेशन भी दे चुके हैं। रिबेलो कलियानपुर के रहने वाले हैं और उनकी उम्र 39 साल हैl रिबेलो कहते हैं कि उनके तरीके से बोरवेल भरे जाने के साथ-साथ ही पानी वॉटर टेबल तक भी लाया जा सकता है।

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अपनी इस तकनीक के बारे में रिबेलो बताते हैं कि, ‘हम लोग बोरवेल के आसपास 10 फीट गहरा और 10 फीट चौड़ा गड्ढा खोद देते हैं। इसे सुरक्षित बनाने के लिए हम इसे इस तरह कवर कर देते हैं कि एक 5 मिलीमीटर के छेद से पानी अंदर फैल सके, और इसमें एक जाली भी लगाई जाती है जो कि एक फिल्टर का काम करती है और इस तरह धीरे-धीरे रेनवॉटर, वॉटर टेबल तक आ जाता है।’ उनका मानना है कि स्कूल के बच्चे वृक्षारोपण के तहत पौधे लगते हैं और लगाने के बाद उन्हें भूल जाते हैं लेकिन उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिएl रिबेलो के एक जल संरक्षणकर्ता बनने की कहानी भी बड़ी दिलचस्प है।

अगली स्लाइड पर क्लिक कर के जानें किस तरह एक गंभीर दुर्घटना के बाद उनकी ज़िन्दगी में आया नया मोड़…