16 साल की इंदिरा की जिंदगी में आया था ये शख्स जिसके लिए इंदिरा ने…

‘मैं एक आम लड़की हूं कोई अनूठी नहीं,बस फर्क बस इतना है कि आसाधारण पुरूष और अनूठी महिला की बेटी हूं’...

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‘ न उम्र की सीमा हो न जन्म का हो बंधन ‘ जी हाँ जब भी कभी किसी को सच्चा प्यार होता हैं तो वो इंसान कभी भी उम्र नहीं देखता प्यार हो ही जाता है| कहते हैं प्यार की कोई सीमा नहीं होती जब भी कभी किसी को सच्चा प्यार होता है तो उसके लिए धर्म, जाति, उम्र, वर्ग, अमीरी-गरीबी कोई मायने नहीं रखती| आये दिन आप देखते होंगे कि कितने लोगों कि प्रेम कहानियां बनती और बिगडती दिखाई देती होंगी कहीं प्यार हांसिल होता है तो कहीं दूर चला जाता है| आज प्यार की असली परिभाषाएं किताबों तक ही सिमटकर रह गई है|

ऐसा ही एक किस्सा हम आज आपको बताने जा रहे हैं है| यह किस्सा किसी और की ज़िन्दगी का नहीं बल्कि देश की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की जिंदगी का है, जिसके बारे में बहुत ही कम लोग जानते होंगे| जी हाँ इंदिरा ने फिरोज गांधी से शादी तो ज़रूर की थी और वे उनसे प्यार भी करती थीं लेकिन उनकी जिंदगी में सबसे पहला इंसान कोई और था जो उनके पास अपने प्यार का पैगाम लेकर आया था और उस वक़्त इंदिरा गाँधी सिर्फ 16 साल की थीं|

अगले पेज पर जानें उस शख्स का नाम जिसने सुनाया था अपने प्यार का पैगाम लेकिन उसके बाद इंदिरा गाँधी नें…